आई बात समझ में!

father-son-walkingकिसी समय एक बूढ़ा बलोचिस्तान में रहता था ।वैसे वह बहुत गरीब था पर बुद्धि का बहुत अमीर था। उस का केवल एक ही बेटा था उसका नाम  मनि था जिसे उस ने अपनी पूरी मेहनत से खूब ताकतवर बनाया था   पर जब वह बड़ा हुआ उस ने अपने पिता से कहा,” इस छोटे शहर में रहने का क्या फायदा मैं किसी बड़े शहर में  किस्मत अजमाना  चाहता हूँ।”

वह आगे बोला,”किसी ने ठीक ही कहा है ठीक  समय आने पर उस का फायदा उठाओ।”

पिता ने कुछ देर सोचा और फिर उत्तर दिया,”बेकार की बातों को दिमाग से निकाल दो। केवल ताकत से तुम्हें सफलता नहीं मिलेगी।उस के लिये तुम्हें  भाग्य और पैसे की भी जरूरत है।”

लड़के पर पिता के सुझाव का कोई असर नहीं पड़ा। उस ने पिता से कहा,”बाहर जाने के अनेक फायदे हैं वहाँ नई-नई जानकारियाँ मिलती हैं तथा ज्यादा धन कमाया  जा सकता है।”

इस पर पिता बोला,”अच्छे से प्रशिक्षित  धन से युक्त व्यक्ति  ही को अपने देश से दूसरे देश  में जाने की सोचनी चाहिये।”

पर बेटा अपनी जिद्द पर था वह पिता की बात  न मान कर विदेश यात्रा के लिये घर से निकल पड़ा।वह अनजान रास्ते पर चलता रहा।
उस के पैरों में छाले पड़ गये और वह भूखा भी था। तभी वह  नदी के किनारे पँहुचा वह नाव पर चढ़्ना चाह्ता पर उस के पास पैसे नहीं थे। नाव वाले ने उसे कहा ,”पहले किराया दो तब नाव पर चढ़ो।”उस पर नव युवक ने उसे पैसों के बदले  कोट दिया पर नाव चलने पर उस ने नाव वाले की अच्छे से पिटाई की। अपनी ताकत का रोब  दिखाया।

नदी में तेज और ऊँची लहरें उठ रही थी तभी नाव वाला बोला,”अब तो हम सब इस पानी में डूब जायेगें।”यात्रियों ने उत्सुकता से पूछा,”इस से बचने का कोई और तरीका  नहीं  है?”नाव वाला बोला,’अगर कोई पानी के बीचों- बीच  खम्भें से नाव को बाँध दे तभी हम बच सकते हैं।”

युवक अपने आत्म-विश्वास से बोला,”मैं  ताकतवर हूँ तथा मैं इस काम को कर दूँगा।”बदला लेने के लिये जैसे  ही युवक पानी में कूदा नाव वाले ने उस के लिये हाथ से रस्सी  छुड़ा ली और दूसरी तरफ चला गया। युवक चीखता-चिल्लाता रहा किसी ने उस की मदद नहीं की।आखिर बेहोश हो कर पानी के बहाव से बहने लगा।वहाँ वह ब हुत समय तक बेहोश पड़ा   रहा और होश  आने पर  वह  किनारे पर पँहुच गया ।तभी एक  व्यापारियों का कारँवा  वहाँ से निकला।उन्हें उस पर द्या आ गयी ।उन्होंने   उस की  देख भाल की।युवक  रात  को उन की रखवाली करने के लिये तैयार हो गया।पर रात  पड़ते ही सब से पहले  सो गया ।उसे सोता  देख कर कारँवा वाले उसे  छोड़  कर चले गये।

इसी बीच वहाँ का राज कुमार   शिकार के लिये निकला। उस ने उस की रोने की आवाज सुनी।तब उसे अपने सिपाहियों से बुलवाया। उस के दुख की दास्ताँ सुन कर  उस ने  दया से उसे धन दौलत और अनेक उपहार दे कर सब सुख -सुविधाओं के साथ घर पँहुचा दिया। पिता  और पुत्र घर  पहुँच कर गले मिले।पिता ने पुत्र से कहा कि पैसे  के बिना ताकतवर आद मी  उस शेर के समान है  जिस के पँजे धायल हों।”

इस पर नवयुवक बोला,”गोता लगाये बिना समुद्र से मोती नहीं मिल  सकता। भले ही मुझे अनेक कष्ट उठाने पडॅ आखिर में तो मैं कितना धन-दौलत ले कर आया।”
इस पर बूढे ने उसे समझाया कि अगर एक बार तुम्हें ऐसे ही धन मिल गया तो यह न समझना कि हमेशा तुम्हारी कोई मदद  मुफ्त  में करेगा।
इस प्रकार पिता की बात से बेटे को जीवन की सच्चाई समझ आगयी।
आशा है पाठको को भी  जीवन  की एक सच्चाई पता चल गया  होगा।

।।इति।।