बिछुडे ,”आप” बारी-बारी

kejriwal_case--10_660_112313085439आज टी०वी० लगाने पर उदघोषिका जोर-शोर से कह रही थी,”आज की ताजा खबर”-शाज़िया ने “आप” की पार्टी का साथ छोड़ दिया। जो कल तक उस के गुण गान किये बिना कभी पीछे न हटती थी मानों आज पूरी तरह से  केजरीवाल को भूल गयी थी।

किसी ने ठीक ही कहा है,”आज तो श्री नरेद्र सिंह मोदी और पाकिस्तान के प्रधान मन्त्री मिल का गा रहे हैं -“कहो न प्यार है।”वही पाकिस्तान और भारत जो बात-बात पर सिद्ध करते थे कि वे एक न० के दुश्मन हैं।आज अचानक भारत के नये बने प्रधान मन्त्री मोदी और पकिस्तान के नवाज़ शरीफ दोस्त बन गये हैं ।

आज मुझे कुछ समय पहले नेहरू के कार्य काल की याद आती  है जब चीन का प्रधान मन्त्री ,”माओ तस्सी तुंग ” भारत आये थे ।हर कदम पर व हाथ उठा कर वह दोनों नारा लगाते थे,”हिन्दी-चीनी -भाई-भाई।”

पर उसी चीनी प्रधान मन्त्री ने भारत  से वापिस जाते ही अचानक भारत पर  हमला कर दिया  जिस  के लिये  भारत  तैयार नहीं था।भारतीय सैनिक सर्दी के लिये अभ्यस्त नहीं थे। बेचारों के पैर गल गये और उन्हें अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ा।” भारत को पराजय स्वीकार करनी पड़ी।

ऐसे अनुभव के बाद हम पाकिस्तान पर कैसे विश्वास कर सकते हैं?कुछ दिन पहले  आप के मंच  ने दिल्ली  में एक हल-चल मचा दी थी। आप का एक बड़ा मंच बन गया था। पर हर  कोई  धीरे-धीरे  केजरीवाल का साथ छोड़ कर चल पड़ा। एक समय ‘आप’ की पार्टी सब से बड़ी मानी जाती थी आज उस का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है।क्या जोश था आप के सदस्यों  में।

किसी ने ठीक ही कहा है   डूबते हुए जहाज़ को चूहे सब से पहले छोड़ कर चले जाते हैं।आज सभी राजनीतिज्ञ मौके की तलाश में रहते हैं कहीं थोड़ा  सा नुकसान दिखाई दिया सब छोड़-छाड़ कर चले जाते हैं।कोई भी दल के सदस्य बनने के लिये अपनी शर्ते तैयार रखते हैं।

“आप” दल को मन्दी में देख सब से पहले विनोद कुमार बिन्नी ने “आप” नामक दल के प्रति बगावत कर दी।फिर तो धीरे-धीरे कैप्टन गोपी नाथ ,अशोक अग्रवाल ,मधु मारवाड़ी और हारून यूसूफ  सभी धीरे -धीरे साथ छोड़ गये।एक समय जो कुन्बा एक एक कर के सभी सदस्यों से जुड़ कर बना था।  सब बिखर गया  शुरू में ही विचार मत भेद के कारण श्री केजरी वाल ने अन्ना हजारे का साथ छोड़ दिया।कहा जाता है केजरीवाल राजनीति में आते ही महत्वकांक्षी  बन गये।

जिस तरफ सफलता दिखाई देती है सभी का झुकाव उसी ओर हो जाता है। आज सभी मोदी जी में अच्छाईयाँ  देखते  नहीं अघाते।

अब तो देखना यह है कि मोदी सरकार भी क्या क्या परिवर्तन लाने में सफल होगी? सभी आशा के  दीप  जलाये बैठे हैं।जनता की आशा की लौ कभी नहीं बुझती।समय ही सब स्पष्ट  करेगा। मोदी  सरकार  के  विषय में कोई भी निष्कर्ष निकालने से पहले उन्हें भी तो समय देना होगा।

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