पुलिस रक्षक या भक्षक

akammm_2Zs1t_6943आज आश्चर्य तो इस बात है कि पुलिस के वरिष्ट अधिकारी भी यह दुष्कृत कर्म  करते पकडे गये हैं ।कल की बात है समाचार देखते  हुए बार-बार दिखाये जाने वाले पुलिस अधिकारी को इस दुष्कर्म करने की सजा कारावास देने के बदले सुरक्षित जगह पर स्थानातरण दिखाया गया।स्वाभाविक बात है कि दूसरे लोगों को इस के लिये प्रोत्साहन मिलेगा ही।

पिछले कुछ हफ्तों में लड़्कियोँ से रेप के केस दिल्ली , मुम्बई, उत्तर-प्रदेश और गुड़्गावँ में सुने जा  रहे हैं।भले ही उन में से कुछ लड़्कियों को दोषी माना जाये पर उन में से एक बच्ची ५ साल की है। भला उस का दोष कैसे माना जा सकता है?यह सब सुन कर खून खौल जाता है पर मैं हैरान हूँ क्या हम कुछ इन के विरोध में कुछ कर सकते है?

दिल्ली पुलिस जो अपने को रक्षक कहती है वे शक के दायरे में आने वाले लोगों को पकड़्ने की कोशिश करती है पर सामान्यतः असमर्थ हो जाती है।यदि कोई अपराधी पकड़ा भी जाता है तो हमारे कानून उस को सजा देने में सालों लगा देते हैं। तब तक जनता करीब -करीब भूल जाती है।

ऐसे जघन्य पाप बार-बार घटित क्यों होते हैं?वे समाज में हर व्यक्ति की ऐसी सोच है।जब तक सोच नहीं बदलेगी तक  तक  यह दर्दंगी होती रहेगी।इस में जरूरत है सहयोग की। इस के लिये सहयोग करने के लिये हर एक को साथ आना होगा।

‘रेप’ स्वीकार्य नहीं है। हम चुप-चाप इन घटनाओं को होने नहीं देंगे। भारत ही नहीं विश्व के अन्य देश भी इस से पीड़ित हैं।हर दिन नये- नये किस्से सुनने को आते हैं पर भारत में हम हर बात सच-सच रिपोर्ट कर देते हैं। हमारे मीड़िया के लोग इन बातों को बताने में आपत्ति नहीं करते। इसी कारण विदेशों में भारत की छवि बहुत खराब दिखाई जाती है।अच्छी बाते दुनिया के सामने आती ही नहीं पर यह सब सच नहीं है।

अति प्राचीन काल से भारत विश्व का मार्ग दर्शक रहा है।अतः मेरे विचार में मीडिया को भी सोच समझ कर विश्व  के  सम्मुख  भारत  की  छवि  छवि प्रस्तुत करनी  चाहिये।