कितनी बदली है दिल्ली?

आज ‘वीरा’ सीरियल के साथ ही चाय का प्याला समाप्त कर मैंने सोचा चलो जरा ‘आजतक’ पर  समाचार  देखा  जाये।  विशेषतौर पर  कुछ राजनीति की उठा-पटक की जानकारी मिलेगी।आज हर कोई कलम उठाता ही किसी-न किसी स्थान में  गैंग रेप  गैंग की  कहानी  का बयान करता है पर मुझे ‘आजतक ‘ का ‘न्यूज स्त्री रीड़्ररो’ व्दारा प्रस्तुत  ‘रियल्टी चेक’ बहुत अच्छा लगा। चुनाव के दौरान

d7b7a6589771ab58340f200f55c0e655हर राजनैतिक पार्टी ने इस विषय को मुद्दा बना कर बताने की कोशिश की उस की पार्टी अमन शान्ति की तरफ पूरी तरह सतर्क है।पर अगर आप ने आज तक ‘रियल्टी शो’ मिस कर दिया है। तो सच में आप ने सच में खूब अच्छा प्रजेंटशन मिस किया है।मैं तो  उन रिपोरटरों   की भूरि-भूरि प्रशन्सा  कँरूगी जिन्होंने रात भर दिल्ली में होने वाली हुड्दग्ग और पुलिस की लापरवाही  का  आँखो देखा वर्णन किया है। यदि कोई पुलिस-मैन मिल भी गया तो उस का साक्षात्कार(interview) ब हुत रुचिकर था। पिछले साल ठीक इसी दिन वीभत्स भंयकर गैंगरेप के  विरोध में सभी लोग सड़कों पर उतर आये।कई जगह मोम बत्ती ‘प्रोसेशन’ निकाले गये इन सब ने सरकार की नींद को खोल दी और तभी सभी दोषी व्यस्कों को फाँसी की सजा  सुनाई गयी।

पुलिस के एक वरिष्ट अधिकारी का कहना है कि थानों में ‘महिला हेल्प-डेस्क’ बनाये गये हैं। शहर में पुलिस की गश्त बढ़ा दी है।पर ‘आजतक’ के  स्त्री  रिपोर्टरों ने पुलिस के कथन का पर्दापाश कर आज टी०वी० पर ‘रियलटी चेक’ कर सच्चाई का उद्घाटन किया है।पर फिर भी यदि देखा जाये तो फिर ‘ढ़ाक के तीन पात’सब कुछ वैसा ही है । केवल ‘हाई -प्रोफाईल’ केसों पर न्यायालय का ध्यान अधिक रहता  है।

अंजना ओम कश्यप ने बड़ी बहादुरी से इस कार्यक्रम को रात में शुरु किया। यह बात ठीक ही कही गयी  है कि रात को कानून नदारद था और सब ओर अन्धेरा-ही अन्धेरा पसरा था। ऐसे समय में वह  पुलिस  की सच्चाई को सब को दिखा सकें। अंजना के अतिरिक्त स्वाति रैना,शैली मँगलोई, प्रियिंका ,रीमा पराशर ,प्रमिला दीक्षित,उपासना बक्शी और रोशनी के नाम मुख्य हैं।अधिकतर पुलिस स्टेशनों में रात को सब पुलिस वाले घर चले जाते हैं । ड्यूटी की उन्हें कोई चिन्ता नहीं  होती।तभी तो  बस सड़ कों पर कुछ  मनचले बाईकर बदमाशी करते फिरते हैं।चोर,लुटेरों का  राज्य छाया रहता  है। दिन प्रति दिन सड़्कों पर घृणित कार्य करते फिरते हैं।