अध्यापिका का सुझाव

Teacher Helping Kidsप्रतिदिन मैं स्कूल से आ कर घर के काम काज में इतनी व्यस्त हो जाती थी और उस दिन स्कूल में क्या हुआ? पूरी तरह  से भूल जाती थी।एक दिन, सामान्य दिनों की तरह मैं स्कूल से आ कर घर के काम काज में खो गयी तभी दरवाजे पर घन्टी बजी देखा तो एक भद्र पुरुष दरवाजे पर खडे थे। मैंने सदाचारवश उन्हें अन्दर बिठाया और उन की समस्या को पूछा वह बोले,”हम कलकत्ता के रहने वाले हैं इस लिये हमारी हिन्दी अ्च्छी नहीं है।हम अपने सुदीप्तो को भी नहीं पढा सकते वह बोले,”हम ने आप के बारे  में ब हुत सुना है आप हमारे घर आ कर रोज हमारे बेटे को पढ़ा दीजिये।”

मैं ने उन्हें अत्यन्त नम्रता से उत्तर दिया। देखिये मुझे  किसी के घर जा कर पढाने  का समय नहीं मिलता है। अतः किसी दूसरे अध्यापक से सहायता ले लीजिये।

यह सुन कर वह चुपचाप चले गये।इस बात को काफी समय बीत गया।परीक्षा पास आगई।फिर  एक  दिन रात ९ बजे हमारे धर की घन्टी बजी। दरवाजा  खोला  तो  देखा  वही  श्रीमान  अपनी  पत्नी  और  अपने  पुत्र  के  साथ हाथ जोड़े दरवाजे पर थे।इस पर उन्होने एक दुखद घटना सुनाई।उन्होने कहा,” आप के घर से जाने पर मैं अगले दिन स्कूल गया।मुझे  एक  युवा अध्यापक  मिले  जिन्होंने  सुदीप्तो को पढाना शुरू किया।कुछ ही दिन में उन्होंने उस की कापी में लिख दिया कि वह किसी प्रकार भी हिन्दी नहीं सीख सकता।कॄपया किसी और अध्यापक के पास भेजिये।

इसी प्रकार वह क ई अध्यापकों के व्दारा वापिस भेज दिया गया।निराश हो कर उस के पिता फिर मेरे घर आगये वे बोले,”आप की प्रधान अध्यापिका ने भी कहा है कि मैंने ब हुत गल्ती की है। अब आप उन के ही पास जाईये।कृपया मुझे क्षमा कर दीजिये।”

अगले दिन से वह मेरे घर पढ्ने आने लगा।मैंने उसे एक’ चेलेन्ज’की तरह लिया।उस के  माता पिता  अगले  ही हफ्ते मेरे घर सन्देश का ड़िब्बा लेकर आये और साथ ही उस का साप्ताहिक परीक्षा की कापी  भी ।आज उन के चहरे पर खुशी थी। इस प्रकार मुझे उस दिन पैसे के लालची अध्यापकों के  बारे में पता चला  क्यों कुछ अध्यापक स्कूल से निकाल दिये जाते है।

आज हमारा सम्पूर्ण शिक्षा सस्थान का तरीका बदलने की जरूरत है।

मेरी सभी अभिभावको से प्रार्थना  है कि वह अध्यापक का चुनाव सोच समझ करें।